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Tuesday, January 7, 2014

अद्भुत चमत्कारी बजरंग-बाण



मेरा एक परम मित्र है, जो डॉक्टरी की पढाई पढ़ रहा है. यूँ तो वह बहुत होनहार छात्र है और पढाई में भी आगे है परन्तु उसकी शिकायत है की आज कल पढाई में मन नहीं लगता.. रात में नींद भी नहीं आती किसी कम में मन भी नहीं लगता, पता नहीं क्या हो गया ! क्या करूँ !

खैर इस उम्र में अक्सर प्यार मुहब्बत जैसी बातें तो.. ये तो common है क्या हुआ, मगर हाँ अगर मन एकाग्र करना है, विद्या प्राप्ति के लिए और मानसिक और शारीरिक बल प्राप्ति के लिए बजरंग बाण का नित्य पाठ अद्भुत और चमत्कारिक प्रभाव देने वाला है. कितनी ही चिंता हो, तनाव हो या भय जैसा वातावरण भी बन गया हो तो उसमे इस अद्भुत स्तोत्र का पाठ तो तुरंत सुख देने वाला पाया गया है, सैंकड़ों लोगों ने इसको अपनाया है और यह तो कलियुग में और भी ज्यादा महत्वा रखता है क्यूंकि इस समय किसी के पास ज्यादा समय नहीं होता, तो वो केवल ५ या ११ पाठ इसका नित्य कर लें तो मुझे विश्वास है कभी उन्हें निराश नहीं होना पड़ेगा. मेरा खुद का ये अनुभव रहा है की जब भी शुद्ध होकर पूजा के समय इसे करता हूँ, गुरु मंत्र जपने के बाद तो, पहले कुछ श्लोक उच्चारण करते-करते ही ऐसा प्रतीत होता है जैसे मेरे अन्दर पीठ वाली तरफ छाती में कुछ खिल रहा है कोई लहर आई है निचे से जो की एक सेकंड के लिए ऊपर तक गयी.. और सहस्रार में जाकर मिल जाती है और वहां पर भी छोटी वाली जगह पर कुछ खिलने का अनुभव होता है.. जैसे कोई फूल खिल गया हो... सच ये ही तो कुण्डलिनी के कमल दल हैं,, और इसके पाठ से कुण्डलिनी शक्ति कैसे जागृत हो जाति है ? क्यूंकि..

कृपा करहूँ गुरुदेव की नाईं...

यानि हनुमान हमारे गुरु के रूप में हमारे अन्दर विराजमान होते हैं, और गुरु की शक्ति ही तो असल में कुण्डलिनी शक्ति है... सद्गुरुदेवजी ने कुण्डलिनी विवेचन audio c.d. में यही तो समझाया है..

बजरंग बाण का पाठ करने से मन को नियंत्रित किया जा सकता है, कैसे ??

ऐसे..... आपको ज्ञात होगा बजरंग बलि का एक नाम ‘वायु-पुत्र’ भी है.. महाभारत युद्ध में भगवन श्री कृष्ण ने अर्जुन को ये कहा था कि तुम अपने रथ की ध्वजा में हनुमान का चित्र स्थापित कर लो विजय प्राप्ति के लिए, क्यूंकि ये वायु-पुत्र हैं.. इससे तुम्हारे प्राणों की रक्षा हो सकेगी. वायु का सीधा सा सम्बन्ध हमारे प्राणों से होता है, हम सांस लेते हैं, प्राण वायु अन्दर लेते हैं इसिलए तो हम जिंदा हैं ! प्राणों पर अर्थात चंचल चित्त पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिए.. मन पर पूर्ण नियंत्रण रखने के लिए भी हनुमान साधना सर्वोपरि मानी जाति है. जिस व्यक्ति का पूजा पाठ में मन नहीं लगता हो..., या पढाई में मन न लगता हो, रात में नींद नहीं आती हो, उसे अवश्य हनुमान आराधना करनी चाहिए. इससे मन और प्राण स्थिर होते हैं, साधनात्मक उर्जा भी प्राप्त होती है. हम बार-बार जिस बात को दोहराते हैं, या हम जिस तरेह के वातावरण में रहते हैं वैसे ही हम बनते हैं, अतः बजरंग-बाण में पूरी श्रद्धा रखकर इसको बार-बार दोहराने से आत्मिक बल प्राप्त होता है. हमारे अन्दर कष्ट और बाधाओं से जूझने की शक्ति भी जागृत होती है. परिणामस्वरूप हममें निर्भीकता और साहस आता है.

नियम-
स्नान कर पवित्र हो जायें और हनुमान चित्र को अपने सामने स्थापित कर दें. अपने मन में पूर्ण भाव ह्रदय से उनको लाकर के उनका ध्यान करें, निम्न मंत्र पढ़ते हुए.. उस चित्र पर चन्दन, लाल पुष्प, गुड इत्यादि चढ़ा सकते हैं, सामने कोई तेल का दीपक, धुप-अगरबत्ती जला सकते हैं. फिर हाथ जोड़कर पढ़ें-

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं |
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम् ||
सकलगुणनिधानं वानराणामधीश |
रघुपति प्रियाभक्तं वातजातं नमामि ||

जो अतुल बल के धाम, सोने के पर्वत सुमेरु के सामान कान्तियुक्त शरीर वाले, दैत्य रूपी वन को ध्वंस करने के लिए अग्नि स्वरुप, ज्ञानियों में अग्रन्य, सम्पूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी.. और श्री रघुनाथ राम के प्रिय भक्त हैं, उन पवन-पुत्र हनुमान को मैं प्रणाम करता हूँ. ऐसा पाठ करके साधक अपने दायीं और एक लाल आसन और बिछा दे. जैसा की शाश्त्रों में है की जब भी कोई बजरंग बाण का पाठ करता है तो हनुमानजी स्वयं आसन पर आकर बैठते हैं.
हनुमान साधना को पवित्र होकर स्नान आदि करके ही करना चाहिए और उसमे भी किसी प्रकार का साबुन, शैम्पू ये सब नहीं इस्तेमाल करना चाहिए. लाल होती धारण कर, लाल ऊनी आसन पर बैठे तो ज्या अच्छा रहता है.

शाश्त्रों में ये उल्लेखित है की बजरंग-बाण का पाठ स्त्रियों को नहीं करना चाहिए, हाँ ये है की वो धुप-दीपक उनकी मूर्ति के सामने जला सकती हैं. इसका पाठ प्रातः काल, दिन में या रात में सोने से पहले भी कर सकते हैं.


विकट स्थिति में, भूत-प्रेत के भय में, ख़तरे के समय, अच्छी निद्रा के लिए.. किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए घर से निकलते समय इसका पाठ आश्चर्यजनक फल देता है. मगर पूरी एकाग्रता से हनुमानजी को अपने मन में स्थान देते हुए इसका पाठ करें.  



1 comment:

  1. bhai mahilao ko bajrang baan ka paath kyu nhi karna chahiye kya unhe uprokt samsyayen nhi satati hain.....bhutt pret unko nhi lagte agar mahilayen hanumaan ji ko yaad karengi to kya wo unki sahayta ko nhi aayenge.... plss na karne ka karan spasht batayen kyunki mera anubhav isse bilkul alag prakar ka hai.... hanumaan ji mahila purushka bhedbhav nhi karte ye sab bhrantiyan hain....

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