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Tuesday, April 22, 2014

निश्चित दरिद्रता-नाशक महालक्ष्मी प्रयोग



ऐसा हो ही नहीं सकता कि कोई व्यक्ती ये साधना करे और उसके बाद भी उसके
जीवन में दरिद्रता रह जाये ! ऐसा हो ही नहीं सकता कि
ये प्रयत्न अधूरा रह जाये ! तीनों लोक में पूजित महालक्ष्मी और त्रिगुणात्मक
शक्ति की कृपा इस साधना को करने के बाद भी साधक पर न हो, 
ऐसा तो हो ही नहीं सकता !


जीवन के सौभाग्य के क्षण होते हैं जब ऐसी कोई साधना गुरु से मिल जाती है जो कई-कई जन्मों के पापों को समाप्त कर हमें जीवन में पूर्णता दे सके, ऐसी ही एक साधना पूज्य गुरुदेव डॉ० नारायण दत्त श्रीमाली जी के कृपा से हम सब शिष्यों को मिली है, जो की मेरे अलावा कई और शिष्यों ने किया है और प्रत्यक्ष प्रमाण भी अनुभव किया है ! इस साधना को तो कोई भी कर सकता है, न इसमें कोई विशेष नियमों की जरुरत है, न और कोई विशेष सामग्री की झंझट ! आप घर पर बैठ कर ही सीधे इस सधना को संपन्न कर सकते हैं और इसका पूर्ण लाभ ले सकते हैं ! इसके लिए कोई भी दुर्गा माँ का चित्र, विग्रह जो आपके पास हो, ले सकते हैं.. या फिर गुरुधाम से मंगा सकते हैं ! और एक असली मूँगे की माला, जो की असली हो, प्रानाश्चेतना-युक्त हो, आप यदि चाहें तो हमसे संपर्क करके मंगा लें, या फिर कमलगट्टे की माला से ही मंत्र जप, साधना संपन्न कर लें ! ऐसी दुर्लभ साधना तो अन्य मन्त्रों में गिनी ही नहीं जा सकती, क्यूंकि यह क्या है इन मन्त्रों में ऐसी क्या शक्ति है यह तो करने के बाद ही साधक अनुभव करता है ! हमे तो प्रयत्न ये करना चाहिए की ऐसी कोई साधना अगर हमे गुरु परंपरा से प्राप्त हुई हो तो पूर्ण निष्ठा से उसे करें ! बाकि फल देना तो गुरुदेव के हाँथ में है, और जरूर देंगे ही वे.. जिसने पेट दिया है, वह खाना भी देगा ... जिसने साधना दी है..... वो..... सफलता भी.. जरूर देगा !! अतः किसी भी शुभ मुहूर्त में शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को यह साधना शुरू करें !


स्नान कर पवित्र धुली हुई लाल धोती पहनकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठ जायें,
हाँथ में जल लेकर विनियोग मंत्र बोलें -

ॐ अस्य श्री 'दुर्गे स्मृतेति' मंत्रस्य, विष्णु ऋषि, अनुष्टुप छन्दः, श्री महालक्ष्मी देवता, शाकुम्भरी शक्ति, वायु कीलक, मम सकल संकेत कष्ट दारिद्रय परिहारार्थं जपे विनियोगः |


ध्यान - दोनों हाँथ जोड़ कर माँ के स्वरुप का ध्यान करें, और यह मंत्र पढ़ें |

विद्युद्दाम-सम-प्रभां मृगपति-स्कंध-स्थिताम-भीषणाम् | 
कन्याभिः करवाल-खेट-विलसद्-हस्ताभिरा सेविताम् ||
हस्तैश्चक्र-गदासि-खेट-विशिखं चापं गुणं तर्जनीम् |
विभ्राणामनलात्मिकां शशिधरां दुर्गां त्रिनेत्रां भजे ||

फिर एक-एक माला निम्न 3 मन्त्रों की फेरें -

ॐ ऐं सद्रूपिणी महासरस्वती वाग्भव ब्रह्म विद्यायै त्वां |
ॐ ह्रीं चिद्रूपिणी महालक्ष्मी, माया ब्रह्म विद्यायै त्वां |

ॐ क्लीं आनंद रूपिणी महाकालिके कामरूपे ब्रह्म विद्यायै त्वां |

इसके बाद इस मूल मंत्र की असली प्राण-प्रतिष्ठित मूँगे की माला से यथासंभव जाप करें | लोग आजकल सस्ती चीजों के चक्कर में 200-250 रुपये में लाल रंग की माला ले आते है, और समझ लेते हैं की उनके पास मूँगे की माला है, पर ऐसा बिलकुल नहीं है ! वे कितने भ्रम में रहते हैं , और जब साधना के प्रभाव में न्यूनता दिखती है तो अफ़सोस करते रह जाते हैं ! मेरे भाइयों आप जरा खुद अनुमान लगायें, जब साधारण मूँगे की अंगूठी भी 2-2,500 की आती है, तो पूरी 108 मानकों की माला कितने तक की आएगी....., 250 रुपये में ?? :)
फिर भी, क्यूंकि मुझे थोड़ी तो सदगुरुदेव कृपा से रत्नों का ज्ञान रहा है, और अच्छे अनुभवी लोग मिले हैं, जिससे मैं कम करा कराकर पांच हजार मात्र राशि में छोटे मनकों की ऐसी माला इच्छुक साधकों को दिलवा पाउँगा.. जो कि प्राण-प्रतिष्ठित होती है, वैदिक पद्धति से गुँथी हुई होती है और साधना करने के योग्य होती है ! बांकी का निर्णय मैं आप पर छोड़ता हूँ ! और बांकी का क्यूं, पूरी साधना करने या नहीं करने का निर्णय भी आप पर ही छोड़ता हूँ .... :)... और वह मूल मंत्र है -


ॐ ह्रीं दुं दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेष जन्तो स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि | यदन्ति यच्च दूरके भयं विन्दन्ति मामिह पवमानवीतं जहि दारिद्रय दुःख भय हारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता स्वाहा ||


इस मूल मंत्र का जप कुल पैंतालिस हजार का करना है, जो कि 11 दिनों में या 21 दिनों में कर लेना चाहिए ! इसके बाद उसके अगले दिन मंत्र जप का दशांश होम, उसका दशांश तर्पण और ब्राह्मण भोज !
निश्चय ही फिर जन्मों की दरिद्रता का नाश होता है और महालक्ष्मी के आगमन के लिए सभी द्वार खुल जाते हैं !


1 comment:

  1. Hello kunal I want parad shivling plz guide me.
    I am an astrologer from Orissa.
    sonu28ctc@gmail.com

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