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Thursday, May 8, 2014

पारद के बारे में...

Raslingam


पारा एक मूल्यवान धातु है
, जिसे संस्कारित करने से यह सभी धातुओं में सबसे ज्यादा मूल्यवान और गुणकारी बन जाता है, जिससे यह आध्यात्मिक और चिकित्सा दोनों क्षेत्रों में प्रत्येक प्रकार से पूर्णता देने में यह समर्थ हो जाता है | पारद तो एक ऐसी धातु है जो सभी अन्य धातुओं से भिन्न है, सामान्य तापमान में यह रहता है तरल रूप में, जबकि सभी अन्य धातु होते हैं ठोस ! पारद में ऊर्जा ग्रहन करने की और आकर्षण की तीव्र क्षमता होती है, इसीलिए तो इसका महत्व आकर्षण साधना , लक्ष्मी आकर्षण साधना , श्री साधना में सर्वाधिक महत्व रखता है | आपने खुद देखा होगा, जब हम एक Thermometer को अपने शरीर से सटाते हैं तो बस कुछ ही पलों में पारा फैलने लगता है, और हमारे शरीर के तापमान जितना फैल जाता है, इसकी इस प्रक्रिया को Thermal Expansion कहते हैं, इसका अर्थ ये निकलता है कि ऊर्जा से इसका सम्बन्ध आसानी से स्थापित हो जाता है, यह किसी भी प्रकार की उर्जा को ग्रहण करने में अन्य धातुओं के मुकाबले कई गुणा ज्यादा सक्षम है, अगर यह बिना संस्कारित किये और कई प्रकार के दोषों से युक्त भी ऐसा कर लेता है तो संस्कारित पारद तो निश्चित रूप से सोच से कई गुणा अधिक सकारात्मक परिणाम अवश्य देगा !

अब आप कल्पना करिए की अगर आप कोई यन्त्र या फिर पारद शिवलिंग कहीं से प्राप्त करके इसपर आप साधना संपन्न करते हैं, पूजन करते हैं, तो क्या आपको कोई सफलता पाने से रोक सकता है ?? नहीं.... सफलता तो मिलती ही है साथ ही संस्कारित पारद आपके परिश्रम को और मंत्र जप का कई-कई गुणा बढ़ाकर फल प्रदान करता है ! बस वह सही तरीके से संस्कार संपन्न हो, तो...

अगर पारद शुद्ध हो, तो वह स्वाद रहित और गंध रहित होता है, और उसमे विलक्षण क्षमता होती है ग्रहण करने की, शास्त्रों के अनुसार जड़ी-बूटी जस्ते के द्वारा भक्षित है, जस्ता बंग से, बंग तांबे से, ताम्बा रजत से, रजत स्वर्ण से और स्वर्ण संस्कारित पारद के द्वारा बुभुक्षित होता है ! परन्तु पारद के संस्कारों में पारद का मुख खोलना अत्यधिक महत्वपूर्ण एवं गोपनीय क्रिया है, इसको पढके तो समझा ही नहीं जा सकता, न किया जा सकता है ! पारद कौन सी विधि से या किस प्रयोग को करने के पश्चात बुभुक्षित होगा  ?.........

और बुभुक्षित पारद भी कई प्रकार के होते हैं, आपको कितनी भूख लगी है, उतना ही भोजन आप खायेंगे. अगर 'राक्षस बुभुक्षित' हो गया है पारद तो बहुत ज्यादा स्वर्ण या अन्य ग्रास उसे देना पड़ेगा ! अगर भस्म बुभुक्षित हो गया, तो उसकी भूख अनंत है, जो भी खिला लो जितना भी खिलालो सब भस्म ही होना है | अतः इसमें यह बहुत आवश्यक है कि वह सामान्य बुभुक्षित हो, ताकि हम उसे स्वर्ण ग्रास दें, या अन्य ग्रास दें और वह उसे ग्रहण करके लाभप्रद भी हो !

पारद संस्कार में अत्यधिक महत्वपूर्ण एक और संस्कार है जिसके द्वारा हम पारद को नपुंसकता से पौरुषवान बनाते हैं, उसके बाद ही तो वह आपके लिए फलप्रद हो पायेगा ... पहले कैसे ?? अगर पारद से वेधन कराना है, और उसे पौरुषता प्रदान नहीं करी, वह अभी बाल्यावस्था में ही है, तो वह वेधन कैसे कर सकता है !
तो यह कैसे संभव हो पायेगा
, और कितना समय इसके लिए लगेगा, जब हम सामान्य मनुष्य को बड़े होने में इतने साल लग जाते हैं तो... पर मित्रों, यह सब क्रियाएं भी मुश्किल नहीं रह जातीं, बस समझाने वाला और सिखाने वाला होना चाहिए..:) जो कि आज कल दुर्लभ ही नहीं अति दुर्लभ बात है.

अब बात करते हैं इनके प्रयोगों की.. आपमें से कितनों ने विभिन्न प्रकार के लुभावने लेख पढके अपने पास पारद के विग्रह और सामग्रियां मंगायीं होंगी, पिछले कुछ वर्षों में.. जो होड़ लगी थी, उसमे कौन नहीं शामिल था ! और ऐसे-ऐसे व्यक्ती भी आज हैं जिन्होंने जल्दी-जल्दी लाखों तक की सामग्री तो मंगवा ली घर में, पर उसपे किये जाने वाले प्रयोग एक भी नहीं मालूम ! खैर प्रयोग तो आप बाद में सीख लेंगे, पहले ये तो देखें कि क्या आपने जो पारद विग्रह मंगाई है क्या वह शुद्ध पारद से निर्मित है ??

क्या उसपे काले-काले परत जम जाते हैं
, उसके ऊपर से....?
और क्या आपको उसे प्रदान करते समय ये कहा गया था कि यह धन की वर्षा सी करा देता है, पर इसके बावजूद भी आप जस के तस हैं, व्यापार ठ़प का ठप है ...? ऐसा कैसे हो सकता है, यदि शुद्ध, बिलकुल pure पारद है तो ऐसा तो वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ही संभव नहीं है, जब शास्त्रों में लिख दिया है की ऐसे संस्कारित स्वर्ण ग्रास दिए हुए पारद के शिवलिंग के पूजन से १००० गौ दान का पुण्य मिलता है, तो वह सारा पुण्य कहाँ गया ?

कहीं किसी की जेब में तो नहीं गया........ :P

इस सब फरेब और फ्रॉड के लिए जो जिम्मेदार है, वह शक्श कौन है.....

(क्रमशः)

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